परिवार में संवाद और समय देना जरूरी, बच्चों के लिए माता-पिता बनें आदर्श: मोहन भागवत
Communication and spending time with the family are essential
नई दिल्ली। Communication and spending time with the family are essential, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने परिवार में घटते संवाद पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि परिवार में समय देना और संवाद बनाए रखना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
बच्चों की जिज्ञासाओं का समाधान माता-पिता को करना होगा, जिसके लिए स्वयं का ज्ञान भी निरंतर बढ़ाना जरूरी है। बच्चे उपदेश से अधिक अनुकरण से सीखते हैं, इसलिए माता-पिता को स्वयं आदर्श आचरण प्रस्तुत करना चाहिए।
कई बार जानबूझकर फैलाया जाता है भ्रम
डॉ. भागवत विश्वमांगल्य सभा की ओर से डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित युगानुकूल मातृत्व विषयक प्रबोधन बैठक के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि समाज में अनेक विमर्श भ्रम के कारण चलते हैं और कई बार जानबूझकर भ्रम फैलाया जाता है।
भारतीय संस्कृति के बारे में भी लंबे समय तक भ्रम फैलाया गया कि हमारी परंपराएं गलत हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि हमारा सांस्कृतिक आधार अत्यंत प्रबल और प्रत्यक्ष है। हमें अपने इतिहास, ज्ञान व परंपराओं पर विश्वास रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
व्यवस्था को मजबूत करना समय की आवश्यकता
उन्होंने कहा कि एकता ही सत्य है और विविधता के बीच एकात्म भाव भारतीय संस्कृति का मूल संदेश है। भारत में रहते हुए भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों के अनुरूप जीवन जीना चाहिए। अन्य देशों की जीवनशैली को बिना विचार किए अपनाने के बजाय भारतीय दृष्टिकोण के आधार पर समाज और परिवार व्यवस्था को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
मातृत्व विषय डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि मातृत्व की शाश्वत बातें वही हैं, वह युग के अनुसार बदलती नहीं है। उन बातों के कारण युग में परिवर्तन करने वाले उत्पन्न होते हैं। आदिकाल से सृष्टि मातृत्व के आधार पर ही चलती आई है। हर जीव की उत्पत्ति होती है, तो उसमें मातृत्व आता ही है, माता रहती ही है।
उन्होंने कहा कि सृष्टि का सृजन, संवर्धन, पोषण यह बिना मातृत्व के संभव नहीं है। प्रबोधन बैठक के समापन सत्र में विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत 900 से अधिक प्रबुद्ध मातृशक्ति उपस्थित रही।